हाल ही में अमेरिका ने अवैध रूप से रह रहे 104 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया है, और अब 487 और भारतीय प्रवासियों को निष्कासन आदेश जारी किए गए हैं। इस प्रक्रिया के दौरान निर्वासितों के साथ कथित दुर्व्यवहार की खबरें सामने आई हैं, जिनमें उन्हें हथकड़ी और बेड़ियों में बांधकर भेजा गया। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने चिंता व्यक्त की है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया:
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि अमेरिका ने 487 संभावित भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी दी है, जिन्हें निष्कासन आदेश जारी किए गए हैं। इनमें से 298 व्यक्तियों का विवरण भारत को प्राप्त हुआ है, और उनकी नागरिकता की पुष्टि की जा रही है। मिस्री ने कहा कि निर्वासितों के साथ दुर्व्यवहार का मुद्दा वैध चिंता का विषय है, और भारत ने इस पर अमेरिका के साथ अपनी चिंताओं को साझा किया है।
अमेरिका की ओर से स्पष्टीकरण:
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, निर्वासन की प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है, जिसमें कुछ मामलों में प्रतिबंधात्मक उपकरणों का उपयोग शामिल है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि महिलाओं और बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाता।
भारत की स्थिति:
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अवैध प्रवास को हतोत्साहित करता है और अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में कहा कि भारत सरकार अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि निर्वासित भारतीय नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार न हो।
निष्कर्ष:
अवैध प्रवासियों के निष्कासन के दौरान मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करना आवश्यक है। भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर संवाद जारी है, और उम्मीद है कि भविष्य में निर्वासन की प्रक्रिया में निर्वासितों के साथ सम्मानजनक व्यव
हार किया जाएगा।

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