फूलों की बारिश, लग्जरी SUV की सवारी… पाकिस्तान में हमास नेताओं को जैश-लश्कर दे रहे VIP ट्रीटमेंट
पाकिस्तान आतंकियों की शरणस्थली बनने में कोई कसर नहीं छोड़ता। हाल ही में, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में हमास के नेताओं को जिस तरह का स्वागत मिला, वह पाकिस्तान की आतंक समर्थक नीति को फिर से उजागर करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों ने हमास के प्रमुख नेताओं के लिए न केवल लग्जरी SUV और महंगे होटलों की व्यवस्था की, बल्कि उनके ऊपर फूलों की बारिश भी की।
हमास और पाकिस्तान का बढ़ता गठजोड़
हमास, जो इस्राइल के खिलाफ हमलों के लिए कुख्यात है, अब पाकिस्तान में अपने समर्थकों को मजबूत करता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने हमास के प्रतिनिधियों को पाकिस्तान में VIP ट्रीटमेंट दिया। इन आतंकवादी संगठनों ने न केवल हमास नेताओं की सुरक्षा का इंतजाम किया, बल्कि उन्हें पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठानों के कुछ खास अधिकारियों से भी मिलवाया गया।
लग्जरी SUV, होटल और भव्य स्वागत
रिपोर्ट्स के अनुसार, हमास नेताओं को पाकिस्तान में विशेष गाड़ियों में घुमाया गया, जिनमें बुलेटप्रूफ लग्जरी SUV शामिल थीं। उन्हें इस्लामाबाद और लाहौर के 5-स्टार होटलों में ठहराया गया और उच्चस्तरीय दावतों का आयोजन किया गया। यह आतंकी गठजोड़ पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठनों और हमास के बीच बढ़ते संबंधों को दर्शाता है।
भारत और इस्राइल के लिए खतरा
भारत और इस्राइल पहले से ही पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से सतर्क रहते हैं, लेकिन अब हमास के बढ़ते प्रभाव ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में हमास और लश्कर के बीच संभावित गठबंधन भविष्य में भारत के लिए एक नई सुरक्षा चिंता बन सकता है।
पाकिस्तान का दोहरा रवैया
पाकिस्तान हमेशा से आतंकवाद पर दोहरा रवैया अपनाता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताने वाला पाकिस्तान, हकीकत में आतंकी संगठनों को पनाह देने और सहयोग करने में पीछे नहीं हटता। हमास नेताओं को दिया गया ये VIP ट्रीटमेंट इसी बात का प्रमाण है।
निष्कर्ष
हमास और पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों के बीच बढ़ता गठजोड़ वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। यह न केवल भारत और इस्राइल के लिए चिंता का विषय है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी एक चेतावनी है कि पाकिस्तान आतंकवाद को खत्म करने के बजाय उसे बढ़ावा देने में लगा है। क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर कोई कड़ा कदम उठाएगा, यह
देखने वाली बात होगी।

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