राहुल गांधी की आपत्तियों को आईना दिखाती है UPA के दौर में बढ़े मतदाताओं की संख्या
हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और अचानक बढ़ी संख्या को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में फर्जी वोटर जोड़े जा रहे हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन जब हम इतिहास पर नजर डालते हैं, तो पाते हैं कि यूपीए सरकार के दौर में भी मतदाताओं की संख्या में बड़े स्तर पर बढ़ोतरी देखी गई थी। ऐसे में राहुल गांधी की आपत्तियां कहीं न कहीं खुद उनके दौर की हकीकत को आईना दिखाने का काम कर रही हैं।
यूपीए सरकार में कैसे बढ़ी थी मतदाताओं की संख्या?
2004 से 2014 तक, जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी, तब देश में मतदाताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
2004 के आम चुनावों में कुल मतदाता: लगभग 67.14 करोड़
2009 के आम चुनावों में कुल मतदाता: लगभग 71.69 करोड़
2014 के आम चुनावों में कुल मतदाता: लगभग 83.40 करोड़
यानी 10 वर्षों में 16 करोड़ से ज्यादा नए मतदाता जुड़े। यह आंकड़ा बताता है कि मतदाताओं की संख्या बढ़ना स्वाभाविक प्रक्रिया है, जो समय के साथ जनसंख्या वृद्धि और जागरूकता अभियानों के कारण होती है।
राहुल गांधी के आरोप और सच्चाई
राहुल गांधी का दावा है कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी मतदाता जोड़े जा रहे हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि हर चुनाव से पहले मतदाताओं की संख्या में वृद्धि कोई नई या असामान्य बात नहीं है।
अगर यूपीए सरकार के दौरान मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी स्वाभाविक मानी जाती थी, तो आज इसे साजिश करार देना तर्कसंगत नहीं लगता। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है, जो मतदाता सूची को लगातार अपडेट करता है। इसमें नए युवा मतदाताओं को जोड़ना और पुराने, अप्रमाणिक नामों को हटाना शामिल है।
क्या यह दोहरा मापदंड है?
यूपीए शासन के दौरान जब मतदाताओं की संख्या बढ़ रही थी, तब इसे लोकतंत्र की मजबूती के रूप में देखा जाता था। लेकिन जब यही प्रक्रिया आज हो रही है, तो कांग्रेस इसे चुनावी धांधली बताने में लगी है।
यह स्थिति दोहरे मापदंड को उजागर करती है, जहां विपक्ष में रहते हुए वही चीज़ गलत लगती है, जो सत्ता में रहते हुए सामान्य मानी जाती थी। अगर राहुल गांधी के तर्क को सही मान लिया जाए, तो 2004-2014 के दौरान बढ़े करोड़ों मतदाताओं पर भी सवाल उठने चाहिए।
निष्कर्ष
भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और इसमें मतदाता सूची का अपडेट होना एक सामान्य प्रक्रिया है। राहुल गांधी के आरोपों को उनके ही दौर के आंकड़े आईना दिखाते हैं। अगर वे आज मतदाताओं की संख्या बढ़ने पर सवाल उठा रहे हैं, तो उन्हें यूपीए काल की इसी प्रक्रिया को भी संदेह की नजर से देखना चाहिए।
जनसंख्या वृद्धि, जागरूकता अभियान, और डिजिटल वोटर रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रियाएं मतदाताओं की संख्या बढ़ाने में योगदान देती हैं। ऐसे में हर चुनाव से पहले मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी को साजिश कहना राजनीतिक रणनीति हो सकती है, लेकि
न यह तथ्यों पर आधारित नहीं लगता।

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