ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई ने हाल ही में अमेरिका के साथ
परमाणु वार्ता को "बेवकूफी, नासमझी और बेइज्जती" करार देते हुए, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ किसी भी बातचीत की संभावना को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका ईरान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है, तो ईरान भी उसी प्रकार की प्रतिक्रिया देगा।
खामेनेई ने 2015 के परमाणु समझौते का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने अपने वादों को पूरा नहीं किया और समझौते से पीछे हट गया, जिससे ईरान को कोई लाभ नहीं मिला। उन्होंने कहा, "हमने बातचीत की, रियायतें दीं, समझौता किया, लेकिन हमें वह परिणाम नहीं मिला जिसकी हमें उम्मीद थी।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक "सत्यापित परमाणु शांति समझौते" की इच्छा व्यक्त की है। हालांकि, खामेनेई के इस सख्त रुख से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेझेश्कियान ने हाल ही में कहा था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की सत्यापन प्रक्रिया के लिए अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षकों को अधिक पारदर्शिता प्रदान करने के लिए तैयार है। हालांकि, खामेनेई के ताजा बयान से यह स्पष्ट होता है कि ईरान की सर्वोच्च नेतृत्व की अमेरिका के साथ वार्ता को लेकर गंभीर शंकाएं हैं।
इस बीच, ईरान की मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, जो देश की आर्थिक स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
खामेनेई के इस बयान के बाद, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं, विशेषकर जब दोनों देशों के नेताओं के बीच वार्ता की संभावनाएं कम होती दिख रही हैं।
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