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पीएम मोदी से मिले बिहार के NDA सांसद, नजर नहीं आए जीतन राम मांझी

 





हाल ही में संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लगभग 30 सांसदों से मुलाकात की। इस बैठक में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित थे। हालांकि, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी इस महत्वपूर्ण बैठक से अनुपस्थित रहे, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। 


जीतन राम मांझी की इस अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं, विशेषकर तब जब उन्होंने हाल ही में एनडीए में अपनी पार्टी को पर्याप्त महत्व न मिलने पर नाराजगी जाहिर की थी। मुंगेर में एक कार्यक्रम के दौरान मांझी ने कहा था, "झारखंड में हमको नहीं मिला, ठीक है नहीं मांगे तो नहीं मिला। दिल्ली में भी नहीं मिला। कहते हैं कि हम नहीं मांगे थे तो नहीं मिला, लेकिन ये कोई न्याय है क्या? हमारा कोई अस्तित्व नहीं है?" उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो उन्हें कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ सकता है। 


इससे पहले भी मांझी ने बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए 20 सीटों की मांग की थी और एनडीए में अपनी पार्टी की उपेक्षा पर असंतोष व्यक्त किया था। उनकी इस अनुपस्थिति को उनके और एनडीए के बीच बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। 


प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई इस बैठक में बिहार के अन्य प्रमुख नेता, जैसे केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, रवि शंकर प्रसाद, राधा मोहन सिंह, राजीव प्रताप रूडी, लोजपा से लोकसभा सांसद शांभवी चौधरी, राजेश वर्मा, वीणा सिंह समेत अन्य नेता मौजूद थे। सभी ने प्रधानमंत्री को बिहार की सांस्कृतिक धरोहरों से संबंधित उपहार भेंट किए, जिनमें मधुबनी पेंटिंग, पाग, और मखाना की माला शामिल थीं। 


जीतन राम मांझी की इस अनुपस्थिति ने बिहार की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दिया है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में एनडीए और मांझी के बीच संबंधों में क्या बदलाव आते हैं और इसका बिहार की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।


इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए नीचे दिया गया वीडि

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