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देवयानी खोबरागड़े केस... जो US से भारतीयों की वापसी पर मोदी सरकार को याद दिला रही है कांग्रेस

 





देवयानी खोबरागड़े केस: जब अमेरिका से भारतीयों की वापसी पर मोदी सरकार को कांग्रेस ने दिलाई याद


हाल ही में अमेरिका से भारतीय नागरिकों की वापसी के मुद्दे पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को देवयानी खोबरागड़े केस की याद दिलाई है। यह मामला 2013 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव का बड़ा कारण बना था। आइए जानते हैं कि यह केस क्या था, और आज के संदर्भ में इसे क्यों दोबारा उठाया जा रहा है।



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देवयानी खोबरागड़े केस: क्या हुआ था?


2013 में न्यूयॉर्क में भारत की उप-राजदूत देवयानी खोबरागड़े को अमेरिकी अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया था। उन पर अपनी घरेलू सहायिका संगीता रिचर्ड को अमेरिकी न्यूनतम वेतन से कम भुगतान करने और वीज़ा दस्तावेज़ में गड़बड़ी करने का आरोप था।


इस गिरफ्तारी के दौरान अमेरिकी पुलिस ने उनके साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किया, जिसमें कपड़े उतरवाकर तलाशी लेना और आम अपराधियों की तरह हिरासत में रखना शामिल था। यह भारत के लिए एक बड़ा अपमान माना गया और देशभर में अमेरिका के खिलाफ आक्रोश फैल गया।


भारत सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, अमेरिका के राजनयिकों को विशेष सुविधाओं में कटौती की, और तत्कालीन अमेरिकी राजदूत से स्पष्टीकरण मांगा। अंततः, अमेरिका को देवयानी को वापस भारत भेजना पड़ा, लेकिन यह मामला दोनों देशों के संबंधों में एक बड़े कूटनीतिक विवाद के रूप में दर्ज हुआ।



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अब क्यों उठा यह मुद्दा?


हाल ही में अमेरिकी एजेंसियों ने कुछ भारतीय नागरिकों को वापस भारत भेज दिया, जिसके बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार से सवाल किया। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि "जब यूपीए सरकार में देवयानी खोबरागड़े का मामला हुआ था, तब मोदी जी और बीजेपी ने इसे लेकर काफी आलोचना की थी। लेकिन अब, जब भारतीय नागरिकों को अमेरिका से निकाला जा रहा है, तब सरकार चुप क्यों है?"


कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए भारतीयों के अपमान पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही, जबकि 2013 में बीजेपी ने इसी मुद्दे को बड़ा विवाद बना दिया था।



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क्या है मोदी सरकार का रुख?


मोदी सरकार की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत-अमेरिका संबंध आज पहले की तुलना में अधिक मजबूत हैं।


2013 में भारत ने कड़ा रुख अपनाया था क्योंकि मामला एक राजनयिक अधिकारी का था, लेकिन इस बार मामला भारतीय नागरिकों से जुड़ा है, जिसमें कानूनी और कूटनीतिक दृष्टिकोण अलग हो सकता है।



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निष्कर्ष


देवयानी खोबरागड़े मामला भारत की कूटनीतिक शक्ति और अमेरिका के साथ संबंधों की एक बड़ी परीक्षा था। कांग्रेस इस मुद्दे को फिर से उठाकर मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़ा कर रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मामला भविष्य में भारत-अमेरिका रिश्तों को प्रभावित करेगा या नहीं।



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आपकी राय क्या है?


क्या आपको लगता है कि मोदी सरकार को अमेरिका से कड़े शब्दों में जवाब मांगना चाहिए, या फिर कूटनीतिक संबंधों को प्राथमिक

ता देनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में साझा करें!


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